नारागांव बना छत्तीसगढ़ का पहला सोलर गांव, 150 घरों में सौर ऊर्जा, महिलाओं ने रचा इतिहास
बालोद। जगन्नाथ साहू। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के नारागांव ने स्वच्छ ऊर्जा और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। सोलर दीदियों की मेहनत और सामूहिक प्रयासों से नारागांव प्रदेश का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां 150 से अधिक घरों में सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ गांव ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है।
02 नवंबर को स्वर्गीय सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम में आयोजित एक दिवसीय राज्योत्सव समारोह में इस विशेष उपलब्धि के लिए सोलर दीदियों को सम्मानित किया गया।
घर-घर पहुंचाया सौर ऊर्जा का संदेश
नारागांव को सौर ऊर्जा से जोड़ने में सोलर दीदियों की अहम भूमिका रही। इन महिलाओं ने घर-घर जाकर ग्रामीण परिवारों को सौर ऊर्जा के फायदे बताए और उन्हें अपने घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवाने के लिए प्रेरित किया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से यह अभियान सफल हुआ और देखते ही देखते 150 से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ गए।
बिना अतिरिक्त सरकारी सहयोग के तैयार हुआ मॉडल
इस पहल की सबसे खास बात इसका शून्य हितग्राही अंशदान और शून्य अतिरिक्त शासकीय सहयोग का मॉडल है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी के अनुसार, इस अभियान में हितग्राहियों को अपनी ओर से कोई अतिरिक्त राशि नहीं देनी पड़ी। वहीं, इसके लिए किसी अतिरिक्त सरकारी अनुदान या सीएसआर राशि का भी उपयोग नहीं किया गया। सोलर दीदियों के प्रयासों, जनभागीदारी और बेहतर प्रबंधन से इस मॉडल को सफल बनाया गया।
महिलाओं को मिला आर्थिक संबल, 2.50 लाख रुपये से अधिक की आय
यह पहल केवल गांव को सौर ऊर्जा से जोड़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बनी है। सोलर दीदियों को इस कार्य के माध्यम से अब तक 2.50 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो चुकी है। इससे महिलाओं को रोजगार और आर्थिक मजबूती के साथ विकास कार्यों में नेतृत्व करने का अवसर भी मिला है।
दूसरे गांवों के लिए बनेगा प्रेरणा मॉडल
नारागांव की यह उपलब्धि बताती है कि यदि महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिले और ग्रामीण समुदाय एकजुट होकर प्रयास करे, तो विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है। सौर ऊर्जा के उपयोग से स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा मिलने के साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
नारागांव अब छत्तीसगढ़ में स्वच्छ ऊर्जा, महिला सशक्तीकरण और जनभागीदारी का एक उदाहरण बनकर उभरा है। गांव की यह पहल आने वाले समय में प्रदेश के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
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